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जानिए! कितना खतरनाक है गर्भपान कराना?

दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहने वाली कमला (बदला हुआ नाम) की नई नई शादी हुई थी. अभी शादी को चार महीना ही हुआ था और कमला का पीरियड मिस हो गया.

वह इतनी जल्दी बच्चा नहीं चाहती थीं. इसके लिए वह मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार नहीं थीं. इसलिए वो गर्भपात कराने एक महिला डॉक्टर की क्लीनिक पहुंचीं. लेकिन पति को बिना बताए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में हर साल 5.6 करोड़ महिलाएं गर्भपात करातीं है, जिनमें से 45 फीसदी गर्भपात असुरक्षित होते है.

गर्भपात पर इतने सवाल क्यों ?

कमला के साथ भी ऐसा ही हुआ. अकेली महिला को गर्भपात के बारे में बात करते सुन महिला डॉक्टर ने कहा, “अगर अस्पताल में चल कर गर्भपात कराती हो तो 4000 रुपये लगेंगे और पति को भी काग़ज पर दस्तखत करना पड़ेगा. यहां क्लीनिक में भी मैं कर सकती हूं. खर्चा थोड़ा कम होगा और हाथ के हाथ हो जाएगा.”

कमला को पैसे की भी चिंता थी और पति की भी. इसलिए उसने तुरंत गर्भपात के लिए हामी भर दी. पर ऐसे गर्भपात में अकसर असुरक्षित होने का ख़तरा रहता है.

अमरीका के गुटमाकर विश्वविद्यालय के साथ मिलकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसके मुताबिक दुनिया के 97 फीसदी असुरक्षित गर्भपात एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमरीकी देशों में होते है.

कमला ने जिस डॉक्टर से गर्भपात कराया था, उसने अपने घर पर ही क्लीनिक खोल रखा था. पूरी प्रक्रिया करीब आधे घंटे तक चली. बाद में डॉक्टर ने दो दिन बिस्तर पर रहने की सलाह दी और हफ्ते भर के लिए आयरन की गोली खाने को कहा.

कमला को भी लगा सब ठीक से निपट गया और किसी को न कुछ बताने की जरूरत पड़ी और न ही पूछने की. लेकिन तीन महीने बाद कमला को फिर पीरियड्स में परेशानी आई. लेकिन मामला इस बार प्रेगनेंसी से जुड़ा नहीं था बल्कि पहले कराए गए गर्भपात से जुड़ा था. दिक्कतें बढ़ीं तो कमला को बड़े अस्पताल जाना पड़ा और पति को पिछली बात भी बतानी पड़ी.

क्या कहते हैं आंकड़ें?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया भर में कराए जा रहे गर्भपात को तीन श्रेणियों में बांटा है. सुरक्षित गर्भपात, कम सुरक्षित गर्भपात और बुहत कम सुरक्षित गर्भपात.

सुरक्षित गर्भपात को परिभाषित करते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे गर्भपात प्रशिक्षित डॉक्टरों की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों का पालन करते हुए कराए जाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में 55 फीसदी गर्भपात सुरक्षित गर्भपात की श्रेणी में आते हैं.

कम सुरक्षित गर्भपात भी प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा ही कराए जाते हैं लेकिन इसमें किसी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों का पालन नहीं किया जाता. इस रिपोर्ट के मुताबिक 31 फीसदी गर्भपात कम सुरक्षित गर्भपात की श्रेणी में आते हैं.और बुहत कम सुरक्षित गर्भपात में न तो डॉक्टर प्रशिक्षित होते हैं और न तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों को माना जाता है. रिपोर्ट में ऐसे गर्भपातों की संख्या 14 फीसदी बताई गई है.

रिपोर्ट में भारत जैसे विकासशील देशों पर भी अलग आंकड़े दिए गए हैं. इसके मुताबिक भारत जैसे विकासशील देशों में 50 फीसदी तक असुरक्षित गर्भपात होते हैं. इसके पीछे कई कारणों में से एक गर्भपात से जुड़ा कानून भी है.

भारत में क्या है क़ानून

भारत में मौजूदा क़ानून इस बात की इजाज़त नहीं देता कि कमला को गर्भपात कराते समय काग़ज पर पति के दस्तख़त कराने की जरूरत पड़ती. लेकिन डॉक्टर ने फिर भी ऐसा किया.

इसलिए भारत में भी गर्भपात कानून में बदलाव की पहल शुरू की गई है. मौजूदा कानून में शादीशुदा महिलाओं को गर्भपात कराने की इजाज़त है. इसलिए अकसर अविवाहिता डॉक्टर के पास जाकर गर्भपात कराने से बचती है.

क्यों है क़ानून में बदलाव की ज़रूरत

2014 में जो गर्भपात कानून में बदलाव प्रस्तावित किया गया है उसके मुताबिक सभी महिलाओं को इसकी इजाज़त दी गई है.

इसके अलावा गर्भपात कराते समय निजता का ध्यान रखा जाए. नए कानून में इसको भी जोड़ा गया है. पहले महिलाएं डॉक्टरों के पास इसलिए भी जाने से हिचकती क्योंकि उनसे कई निजी सवाल किए जाते थे.

इतना ही नहीं, नए नियमों के मुताबिक गर्भपात के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या कम न पड़े इसलिए आयुष के अंदर आने वाले डॉक्टरों को भी गर्भपात कराने की इजाज़त दी जा रही है.

हालांकि इस कानून को अभी संसद से मंजूरी मिलने में वक्त है. तब तक कमला जैसी कई महिलाओं को गर्भपात कराते समय सवालों से दो चार होते रहना पड़ेगा.

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