क्राइम राजनीती

भारतीय रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का इस्तीफ़ा, प्रभु के टैन्योर में 20 हादसे, 9 काफी बड़े

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अशोक कुमार मित्तल ने चार दिनों के भीतर हुए दो रेल हादसों के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मित्तल के इस्तीफ़े के बाद एयर इंडिया के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन अश्वनी लोहानी को इसका नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है.

अशोक मित्तल को दो साल का एक्सटेंशन मिला था. उन्हें इस पद पर अगले साल 31 जुलाई तक बने रहना था.

मुज़फ़्फ़रनगर के समीप उत्कल एक्सप्रेस रेल हादसे के बाद से लोगों में रेल मंत्रालय को लेकर नाराजगी थी. फ़िर बुधवार की सुबह कानपुर के पास औरैया में कैफ़ियत एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया.

इसके बाद ही बुधवार सुबह पहले रेल बोर्ड के चेयरमैन अशोक कुमार मित्तल के इस्तीफ़े की ख़बर आई और फिर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर इशारों-इशारों में पद छोड़ने की बात कही है.

उनके इस्तीफ़े के बाद अश्वनी लोहानी को रेलवे बोर्ड की ज़िम्मेदारी दी गई है. लोहानी भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा (आईआरएसई) के 1980 बैच के अधिकारी हैं.

एयर इंडिया से पहले लोहानी दिल्ली डिविजन के डीआरएम, राष्ट्रीय रेल संग्रहालय के निदेशक, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के निदेशक और भारतीय पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं.

 ट्वीट्स में प्रभु ने क्या कहा….
– बुधवार को सुरेश प्रभु ने कुछ ट्वीट किए। कहा- तीन साल से कम वक्त में मैंने अपना खून-पसीना रेलवे को सुधारने में लगाया। पीएम की लीडरशिप में दशकों पुराने सिस्टम को सुधारने और रेलवे में इन्वेस्टमेंट की कोशिश की। नए भारत के लिए पीएम चाहते हैं कि रेलवे बेहतर और मॉडर्न बने। मैंने इस वादे को पूरा करने की कोशिश की। रेलवे प्रोग्रेस की इसी लाइन पर आगे बढ़ रहा है। लेकिन, हाल के हादसों से मैं बहुत दुखी हूं। कुछ पैसेंजर्स को जान गंवानी पड़ी। पीएम से मिलकर इन हादसों की जिम्मेदारी ली। पीएम ने मुझसे इंतजार करने के लिए कहा है।
प्रभु के टैन्योर में 20 हादसे, 9 काफी बड़े
– नवंबर 2014 में प्रभु को मोदी ने रेलवे जैसी अहम मिनिस्ट्री दी थी। इसके बाद से उनके टैन्योर में करीब 20 रेल हादसे हुए। इनमें से 9 बड़े एक्सीडेंट रहे।
1) एनीकल डिरेलमेंट
– 13 फरवरी 2015 को शाम सात बजे बेंगलुरु-एर्नाकुलम इंटरसिटी एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। दो कोच में बैठे 10 लोगों की मौत हुई। 154 जख्मी हुए।
2) जनता एक्सप्रेस डिरेलमेंट
– देहरादून-वाराणसी एक्सप्रेस 20 मार्च 2015 को राय बरेली में डिरेल हुई। 58 लोगों की मौत हुई जबकि 150 घायल हुए। वजह टेक्नीकल फैल्योर थी।
3) कौशाम्बी डिरेलमेंट
– 25 मई 2015 को राउरकेला-जम्मू तवी मुरी एक्सप्रेस यूपी के कौशाम्बी में डिरेल हुई। पांच लोगों की मौत और 50 घायल हुए।
4) कामायनी-जनता एक्सप्रेस डिरेलमेंट
– मध्य प्रदेश के हरदा में 4 अगस्त 2015 को कामायनी और जनता एक्सप्रेस डिरेल हुईं। खास बात ये थी कि दोनों ही ट्रेनें एक के बाद एक और एक ही स्पॉट पर डिरेल हुईं। 31 लोगों की मौत हुई जबकि करीब 100 लोग घायल हुए।
5) दुरंतो एक्सप्रेस डिरेलमेंट
– सिकंदराबाद-लोकमान्य तिलक दुरंतो एक्सप्रेस कर्नाटक के कलबुर्गी में डिरेल हुई। 2 लोगों की मौत जबकि 7 घायल हुए।
6) कालका-शिमला डिरेलमेंट
– नैरो गेज ट्रेन शिवालिक क्वीन 12 सितंबर 2015 को डिरेल हुई। इसमें 36 ब्रिटिश टूरिस्ट्स भी थे। 2 की मौत जबकि 15 घायल हुए।
7) इंदौर-पटना एक्सप्रेस डिरेलमेंट
– 20 नवंबर 2016 को यह हादसा हुआ। इंदौर-पटना एक्सप्रेस कानपुर में हादसे का शिकार बनी। 150 पैसेंजर्स की मौत हुई। जबकि इतने ही घायल हुए।
8) हीराखंड एक्सप्रेस डिरेलमेंट
– जगदलपुर से भुवनेश्वर जाने वाली हीराखंड एक्सप्रेस विजयानगर में डिरेल हुई। 41 लोग मारे गए जबकि 84 घायल हुए।
9) उत्कल एक्सप्रेस डिरेलमेंट
– 19 अगस्त को यूपी के खतौली में हादसे का शिकार हुई। 22 लोगों की मौत हुई। 35 घायल हुए।

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