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चीनी सीमाओं से लगी 73 रोड़ में से पिछल्ले 15 सालों में मात्र 27 रोड़ ही हुई तैयार, रक्षा मंत्रालय सख्त

भारत-चीन सीमा पर सामरिक सड़कों के निर्माण में अत्यधिक देर पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्रालय ने परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को और अधिक प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियां दी हैं. बता दें कि बता दें कि सामरिक रू से महत्वपूर्ण 73 रोड में से पिछले 15 सालों में सिर्फ 27 रोड ही बनकर तैयार हुई हैं.  नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 61 सड़कों का बीआरओ द्वारा भारत- चीन सीमा सड़क (आईसीबीआर) परियोजना के तहत निर्माण में अत्यधिक देर होने पर सख्त ऐतराज जताया था, जिसके कुछ महीने बाद बीआरओ को अतिरिक्त शक्तियां देने का फैसला लिया गया है. इन सड़कों की कुल लंबाई 3,409 किलोमीटर है.

महत्वपूर्ण सड़कों और रेल लाइनों का काम अधूरा

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक 1999 में चीनी सीमा से लगी 73 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी और 2012 तक इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की डेडलाइन तय की गई थी. इसी तरह चीन और पाकिस्तानी सीमा के पास सामरिक रूप से अहम 14 रेल लाइनों को बनाने की योजना को 2010 में रक्षा मंत्री ने मंजूरी दी थी. सेना ने नॉर्थईस्ट में 3 और जम्मू-कश्मीर में 1 लाइन चिन्हित की थी. लेकिन अभी तक सिर्फ चार लाइनों का लोकेशन सर्वे ही सरकार अप्रूव कर पाई है.

बीआरओ में बहुत बड़ा बदलाव लाने का इरादा रखता है : रक्षा मंत्रालय

रक्षा मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि यह बीआरओ में बहुत बड़ा बदलाव लाने का इरादा रखता है ताकि कार्य की गति को बेहतर किया जा सके और सेना की जरूरत के मुताबिक वांछित नतीजे प्राप्त किए जा सकें.

मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने बीआरओ को अतिरिक्त प्रशासनिक शक्तियां देने के अलावा स्वदेशी एवं आयातित निर्माण मशीन एवं उपकरण की खरीद के लिए बीआरओ महानिदेशक की वित्तीय शक्तियां बढ़ा कर 100 करोड़ रुपया तक कर दिया है.

अब से पहले महानिदेशक को 7.5 करोड़ रुपये तक के स्वदेशी उपकरण और तीन करोड़ रुपये के आयातित उपकरण खरीदने की शक्ति प्राप्त थी. रक्षा मंत्रालय ने टर्नकी आधार पर सड़क परियोजनाओं के काम में बड़ी कंपनियों को लगाने की बीआरओ को इजाजत देने के लिए नीतिगत दिशानिर्देश को भी मंजूरी दी है.

डोकलाम में भारत-चीन गतिरोध के बीच बीआरओ को दी गयीं शक्तियां

डोकलाम को लेकर भारत और चीन की सेनाओं के बीच तकरार होने के मद्देनजर बीआरओ को ये शक्तियां दी गई हैं. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत-चीन सीमा पर उन सड़कों के निर्माण में देर होने को लेकर भारतीय थल सेना नाखुश है और रक्षा मंत्रालय से परियोजना में तेजी लाने का अनुरोध किया था जिन्हें मूल रूप से 2012 में पूरा होना था.

मंत्रालय ने कहा कि बीआरओ का एक चीफ इंजीनियर अब 50 करोड़ रुपये तक का, अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) 75 करोड़ रुपये तक का और महानिदेशक 100 करोड़ रुपये तक के ठेकों के लिए प्रशासनिक मंजूरी दे सकता है.इन परियोजनाओं को विभागीय या अनुबंधीय प्रणाली के तौर पर पूरा किया जा सकता है. साथ ही, जवाबदेही तय करने को लेकर कार्य की प्रगति की ऑनलाइन निगरानी के लिए एक साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है.

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