जरा हटके फैशन हेल्थ

इंस्टाग्राम पता लगा लेगा, आप डिप्रेशन में है या नहीं!

नई दिल्ली: अक्सर जब लोग परेशान होते हैं, स्ट्रेस या डिप्रेशन में होते हैं तो उनका स्टेटस बदल जाते हैं. वे सोशल मीडिया पर उसी तरह से बिहेव करने लगते हैं. डिप्रेस्ड कोटेशंस पोस्ट करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं सोशल मीडिया पर आपकी तस्वीरों के जरिए भी आसानी से जाना जा सकता है कि आपको डिप्रेशन है या नहीं.

जी हां, हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, ये दावा किया जा रहा है कि इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई फोटोज से आसानी से पता लग सकता है कि आप डिप्रेस्ड है या नहीं.

क्या कहती है रिसर्च-
रिसर्च के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर शेयर की गईं फोटो आपकी मेंटल हेल्थ के बारे में बताती हैं. आमतौर पर फोटो एक्सप्रेशंस, स्टाइल और पर्सनेलिटी को रिफलेक्ट करती हैं. लेकिन ये उससे भी कहीं अधिक चीज़ें बता सकती है.

रिसर्च में कहा गया है कि शेयर की गई फोटोज़ आपकी मेंटल हेल्थ से रिलेटिड हिंट्स देती हैं. जर्नल “ईपीजे डेटा साइंस” में कहा गया कि इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर करने से पहले लोग फोटो में जो बदलाव करते हैं, जैसे की कलर फिल्टर्स चेंज करना या उसकी क्वालिटी इंहैंस करना, उससे लोगों की मेंटल स्टेट का पता लगता है. स्टडी में ये भी कहा गया है कि डिप्रेशन के शिकार लोग सामान्य लोगों की तुलना में दुनिया को अपने अलग नज़रिए से देखते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एंड्रयू रेसी और उनके सह-लेखक क्रिस्टोफर डैनफोर्थ का कहना है कि रिसर्च में देखा गया जो लोग डिप्रेशन से गुज़र रहे थे वे अपनी फ़ोटोज़ को ज़्यादातर ब्लू, ग्रे और डार्कर टोन्स में अपलोड करना पसंद करते हैं.

कैसे की गई रिसर्च-
रेसी और डैनफोर्थ ने कुछ प्रतिभागियों को चुना और उन्हें “डिप्रेस्ड” या “हेल्दी” का टैग उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर दिया. इसके बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपलोडिड फ़ोटोज़ में पैटर्न्स ढूंढने के लिए मशीन-लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल किया.

रिसर्च के नतीजे-
रिसर्च में पाया गया कि डिप्रेस्ड प्रतिभागियों ने इंस्टाग्राम फिल्टर्स का उपयोग कम किया है. ये यूज़र्स “इंकवेल” फिल्टर का प्रयोग ज़्यादा करते हैं, जो कि उस फ़ोटो के कलर को ड्रेन कर देता है और उसे ब्लैक एंड व्हाइट बना देता है. हेल्दी यूज़र्स ने “वेलेंसिया” फिल्टर का प्रयोग ज़्यादा किया है जो कि फ़ोटो के कलर को हल्का कर देता है.

डिप्रेस्ड प्रतिभागी ज़्यादातर अपने फेस की फ़ोटो डालते हैं लेकिन दूसरी ओर हेल्दी प्रतिभागी अपनी फ़ोटोज़ को अलग-अलग पोज़ और पोश्चर्स में डालना पसंद करते हैं.

शोधकर्ता ने भी चेतावनी देते हैं कि ये रिसर्च सभी इंस्टाग्राम यूजर्स पर एप्लाई नहीं होती. इतना ही नहीं, शोधकर्ता डॉ. रेसी और डॉ. डैनफोर्थ का इस रिसर्च के नतीजों को लेकर भी मतभेद है कि फ्यूचर में ये प्लेटफॉर्म मेंटल हेल्थ स्क्रीनिंग को लेकर प्रभावशाली होगा या नहीं.