राजनीती

जिन्हें वंदे मातरम नहीं गाना वो देश से निकल जाएं: संजय राउत

मुंबई
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा है कि जो भी वंदे मातरम नहीं गाएगा उसे देश से बाहर निकल जाना चाहिए। शिवसेना सांसद का यह बयान बीएमसी के उस फैसले के बाद आया है जिसमें गुरुवार को बीएमसी और उसके अनुदान पर चलने वाले सभी स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य करने के प्रस्ताव को पास कर दिया था। बीएमसी के इस फैसले का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। इस प्रस्ताव पर महाराष्ट्र के सीएम की मुहर लगनी जरूरी है।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम और राज ठाकरे की एमएनएस ने इसका विरोध किया है. असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी हिंदुत्व को फैला रही है और वन्दे मातरम अनिवार्य बनाकर धर्मनिरपेक्षता को नष्ट कर रही है. किसी को मजबूर किया जाना गलत है.

स्कूलों में वंदेमातरम के अनिवार्य करने को लेकर विरोधी दलों का कहना है कि ये सरासर गलत है। उनका कहना है कि किसी को जबरदस्ती कुछ करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। एआईएमआईएम के विधायक वारिस पठान ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं नहीं लिखा गया है कि आपको वंदे मातरम गाना ही पड़ेगा। वारिस पठान ने यह भी कहा है कि अगर इसे जबरदस्ती थोपा गया तो इसका अंजाम भुगतना होगा।

वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने बीएमसी के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि यह एक बढ़िया कदम है। किसी को भी वंदेमातरम से आपत्ति नहीं होनी चाहिए। राउत ने यह भी कहा कि जिस किसी को भी इससे आपत्ति है उसे देश से बाहर निकल जाना चाहिए।

गौरतलब हो कि मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में तमिलनाडु में सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सप्ताह में कम से कम एक बार ‘वंदे मातरम्’ का उच्चारण करना अनिवार्य कर दिया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि राष्ट्रीय गीत के लिए मुख्यत सोमवार या शुक्रवार के दिन को वरीयता दी जाए.

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