क्राइम राजनीती

हिन्दी-चीनी भाई-भाई: डोकलाम गतिरोध पर दलाई

नई दिल्ली.तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने बुधवार को कहा कि हिन्दी-चीनी भाई-भाई की भावना ही इन दो बड़े देशों के बीच विवाद हल करने का जरिया है, भारत-चीन को एक-दूसरे के पड़ोस में ही शांति से रहना है। बता दें कि सिक्किम सेक्टर में भूटान ट्राइजंक्शन के पास चीन एक सड़क बनाना चाहता है और भारत इसका विरोध कर रहा है। करीब 2 महीने से इस इलाके में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। चीन ने भारत से कहा है कि वह इलाके से अपने सैनिकों को तुरंत वापस बुलाए, लेकिन भारत ने इससे इनकार कर दिया है।कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना हमारी डेमोक्रेसी को फॉलो कर सकती है…
– दलाई लामा ने कहा, “डोकलाम विवाद कोई बहुत सीरियस मुद्दा नहीं है, पर दोनों देशों को एक दूसरे के पड़ोस में ही रहना है, इस मुद्दे पर गलत प्रोपेगैंडा से बात बिगड़ सकती है। 21वीं सदी का विषय बातचीत है, आधुनिक समय में हर देश दूसरे पर निर्भर है। अभी दोनों पड़ोसी एक-दूसरे के खिलाफ सख्त बयान जारी कर रहे हैं, लेकिन हिन्दी-चीनी भाई भाई की भावना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। 1962 में चीनी सेना बोमडिला जा पहुंची थी, लेकिन वापस लौट गई। भारत और चीन को इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा।”
– “चीनी लोगों की इच्छा के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना हमारे लोकतंत्र का अनुसरण (follow) कर सकती है। हमारी छोटी तिब्बत कम्युनिटी पूरी तरह से लोकतंत्र में यकीन करती है और मैं भी लोकतंत्र का प्रशंसक हूं।”
– दिल्ली में एक प्रोग्राम में दलाई लामा ने कहा, “किसी भी देश के लोग ही उसके असली शासक होते हैं और एक आजाद मीडिया ही लोगों को सच्चाई बता सकता है, उन्हें शिक्षित कर सकता है। जिस देश में आजादी है, वहां हम ज्यादा योगदान दे सकते हैं क्योंकि वहां ज्यादा मौके मिलते हैं, जहां आजादी नहीं है, वहां मैं जाना पसंद नहीं करूंगा।”
– बता दें कि दलाई 1959 के विद्रोह के दौरान तिब्बत से निकल भागे थे और तब से भारत में ही रह रहे हैं। इनका जन्म तिब्बत में हुआ था, जिस पर चीन अपना दावा करता है। चीन सरकार दलाई को अपना दुश्मन मानती है।
चीनी मीडिया लगातार दे रहा है भारत को धमकी
– चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने मंगलवार को अपने एडीटोरियल में कहा था, “भारत 1962 की जंग का सबक भूल गया है, नेहरू ने हमें कमतर आंका था, मोदी भी हमारी वॉर्निंग को नजरअंदाज ना करें। अगर भारत डोकलाम विवाद पर चेतावनी को इसी तरह नजरअंदाज करता रहा तो बीजिंग जरूरी जवाबी कदम उठाएगा।”
– “भारत ने 1962 में बॉर्डर पर भड़काऊ गतिविधियां की। उस वक्त नेहरू सरकार ने माना था कि चीन हमला नहीं करेगा। नेहरू सरकार ने क्षेत्रीय अखंडता (territorial integrity) की रक्षा के लिए चीन सरकार के दृढ़ संकल्प (determination) को कम करके आंका था क्योंकि बीजिंग घरेलू और कूटनीतिक संकटों में फंसा था।”
– “भारतीयों को उम्मीद है कि चीन रणनीतिक चिंताओं की वजह से जंग का खतरा उठाने को तैयार नहीं है। उनका मानना है कि अमेरिका, भारत का साथ देगा, जिससे चीन पर भारी मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ेगा। ऐसा लगता है कि नई दिल्ली को ये नहीं पता है कि चीन-अमेरिकी दुश्मनी किस तरह की है। भारत को ऐसा लगता है कि वॉशिंगटन सिर्फ भारत के सपोर्ट में बयान जारी करके या हिंद महासागर में वॉरशिप भेजकर चीन-भारत बॉर्डर पर स्थिति को प्रभावित कर सकता है। दरअसल, भारत अपनी कानूनी और नैतिक समझ खो चुका है।”
अगर चीन कालापानी और कश्मीर में घुस जाए तो भारत क्या करेगा?
– बाउंड्री मुद्दे पर चीन की टॉप डिप्लोमैट जनरल वांग वेनली ने भारत के इस सुझाव को खारिज कर दिया है कि डोकलाम गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देश इलाके से अपने सैनिकों को एक साथ वापस बुलाएं। वेनली ने मंगलवार को कहा, “अगर एक भी भारतीय सैनिक वहां रहता है तो भी हमारी संप्रभुता (sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता ( territorial integrity) का उल्लंघन (violation) होगा।” भारतीय मीडिया के एक डेलीगेशन से बातचीत में वेनली ने कहा, “अगर चीन उत्तराखंड के कालापानी और कश्मीर में घुस जाए तो नई दिल्ली क्या करेगा? इस वक्त भारत से बातचीत करना असंभव है क्योंकि चीन के लोग सोचेंगे कि हमारी सरकार काबिल नहीं है।” वेनली ने यह भी दावा किया कि भूटान ने डोकलाम को चीन का क्षेत्र मान लिया है।
2 हफ्ते में भारतीय सेना को खदेड़ देंगे, छोटे ऑपरेशन की तैयारी
– इससे पहले, ग्लोबल टाइम्स में 5 अगस्त को पब्लिश एक आर्टिकल में चीनी एक्सपर्ट हू झियॉन्ग ने कहा था, “चीन डोकलाम में लंबे वक्त तक गतिरोध बने रहने की इजाजत नहीं दे सकता, इसलिए वहां से भारतीय सैनिकों को हटाने के लिए 2 हफ्तों के भीतर छोटे पैमाने पर मिलिट्री ऑपरेशन किया जा सकता है।” झियॉन्ग ने यह भी कहा था कि चीन अपना मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने से पहले भारत की फॉरेन मिनिस्ट्री को इन्फॉर्म भी करेगा।
– ग्लोबल टाइम्स ने यह भी कहा था, “मोदी हमारे लिए हार्ड लाइन स्टैंड अपनाकर अपनी अवाम की किस्मत के साथ जुआ खेल रहे हैं और भारत को जंग की ओर धकेल रहे हैं। मोदी को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की जबरदस्त ताकत का अंदाजा होना चाहिए, जो डोकलाम में भारतीय सेनाओं को कुचलने में का माद्दा रखती है।”
क्या है डोकलाम विवाद?
– ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम एरिया में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का कहना है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है।
– इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।
भारत की क्या है चिंता?
– नई दिल्ली ने चीन से कहा है कि चीन के सड़क बनाने से इलाके की मौजूदा स्थिति में अहम बदलाव आएगा, भारत की सिक्युरिटी के लिए ये गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक से चीन को भारत पर एक बड़ी मिलिट्री एडवान्टेज हासिल होगी। इससे नॉर्थइस्टर्न स्टेट्स को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद में आ जाएगा।

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