राजनीती

पीएम मोदी ने दिया नया मंत्र ‘करेंगे और करके रहेंगे’

नई दिल्ली, एजेंसी। मोदी सरकार आज संसद में भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं एनिवर्सरी को खास तरीके से मना रही है। इसके लिए संसद का स्पेशल सेशन बुलाया। मोदी ने कहा कि गांधीजी ने 1942 में कहा था कि पूर्ण स्वराज से कम कुछ भी मंजूर नहीं। आज हमारे पास गांधीजी जैसा नेतृत्व नहीं है। लेकिन कुछ अहम समस्याओं से देश को आजाद कराने का संकल्प ले सकते हैं। उस समय का मंत्र था करेंगे या मरेंगे तो आज करेंगे और करके रहेंगे के संकल्प को लेकर आगे बढ़ेंगे।
मोदी ने कहा कि इतिहास की घटनाएं हमारे लिए आज किस प्रकार सार्थक बने, इसका प्रयास रहना चाहिए। आजादी के आंदोलन में कई उतार-चढ़ाव आए। भारत छोड़ो आंदोलन अंतिम व्यापक जनसंग्रह था। 1942 में ऐसी पीठिका तैयार हुई थी कि देश के हर कोने में लोगों में आजादी की अलख जग गई थी।
उन्होंने कहा कि तिलक ने पूर्ण स्वराज का नारा दिया था। 1920 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन चलाया। भगत सिंह, राजगुरु, चापेकर बंधुओं ने अलग-अलग समय पर बलिदान दिया। गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन में शब्द गूंजे- करेंगे या मरेंगे। देश के लिए ये अजूबा था। गांधीजी ने कहा था कि मैं पूर्ण स्वतंत्रता से कम में संतुष्ट होने वाला नहीं हूं।

अगर आज हमें 2022 के लिए संकल्प लेना है तो हमें देश में भ्रष्टाचार दूर करेंगे और करके रहेंगे, गरीबों को उनका अधिकार दिलाएंगे, दिलाकर रहेंगे। नौजवानों को स्वरोजगार दिलाएंगे, देकर रहेंगे। कुपोषण हटाएंगे, हटाकर रहेंगे। बेड़ियों को खत्म करेंगे, करके रहेंगे। अशिक्षा खत्म करेंगे, करके रहेंगे।

कुछ मुद्दों पर सहमति बनाएं
हम कुछ मुद्दों पर सहमति बनाकर बहुत बड़ा काम कर सकते हैं। हमने अभी देखा। ये मेरा राजनीतिक बयान नहीं है। जीएसटी की सफलता किसी दल की सफलता नहीं है। वह इस सदन में बैठे लोगों की इच्छाशक्ति का परिणाम है। श्रेय सभी को जाता है। राज्यों को, व्यापारियों को। जीएसटी दुनिया के लिए बहुत बड़ा अजूबा है। अगर भारत ऐसा कर सकता है तो और भी कई निर्णय कर सकता है।”

कर्वव्य भाव को जगाएं
दुर्भाग्य से हमारे चरित्र में कुछ चीजें घुस गई हैं। अगर हम चौराहे पर रेड लाइट क्रॉस करके निकल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि हम गलत कर रहे हैं। कानून को तोड़ना हमारा स्वभाव बन जाता है। छोटी-छोटी घटना हिंसा बनती जा रही है।हमें लगता ही नहीं कि हम कानून तोड़ रहे हैं। इसलिए लीडरशिप की जिम्मेदारी होती है कि हम समाज के अंदर इन दोषों से मुक्ति दिलाकर कर्तव्य भाव को जगाएं।

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