यात्रा राजनीती

राम जन्मभूमि से दूर बने मस्जिद: SC में शिया बोर्ड

नई दिल्ली. शिया वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अयोध्या में मस्जिद विवादित जगह से कुछ दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में बनाई जा सकती है। बोर्ड ने ये भी कहा कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ है लिहाजा वो ही ऐसी संस्था है जो इस विवाद के शांतिपूर्ण हल के लिए दूसरे पक्षों से बातचीत कर सकती है। शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि विवाद के हल के लिए उसे कमेटी बनाने के लिए वक्त चाहिए।

विरोध और समर्थन…

– अयोध्या विवाद में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान शिया सेंट्रल बोर्ड आॅफ उत्तर प्रदेश ने अपने एफिडेविट में कहा- बाबरी मस्जिद का इलाका हमारी प्रॉपर्टी है। इस विवाद के हल के लिए दूसरे पक्षों से बातचीत का अधिकार भी हमारे बोर्ड को ही है।
– शिया बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को विवाद के हल के लिए एक फॉर्मूला भी सुझाया। बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद विवादित जगह से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में बनाई जा सकती है।
– बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से अपील में कहा कि इस बड़े विवाद के हल के लिए वो एक कमेटी बनाना चाहता है और इसके लिए उसे वक्त दिया जाए।
– बता दें कि अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस. खेहर ने सुप्रीम कोर्ट के ही तीन जजों की बेंच बनाई थी। ये बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई तमाम अपीलों पर सुनवाई करेगी। बेंच में जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए. नजीर हैं।
– 21 जुलाई को इस मामले की सुनवाई हुई थी। तब चीफ जस्टिस जेएस. खेहर ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई जल्द होगी। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला सुब्रमण्यन स्वामी की उस पिटीशन पर आया था जिसमें उन्होंने इस मामले की अर्जेन्ट सुनवाई की अपील की थी।
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी को एतराज
– बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के जफरयाब जिलानी ने शिया वक्फ बोर्ड को ज्यादा अहमियत देने से इनकार कर दिया। जिलानी ने कहा- ये सिर्फ अपील है और इस एफिडेविट का कानून में कोई महत्व नहीं है।
– वहीं, बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि मेरे हिसाब से शिया वक्फ बोर्ड ने एक अच्छा मैसेज दिया है
क्या है विवाद
– राम मंदिर मुद्दा 1989 के बाद अपने उफान पर था। इस मुद्दे की वजह से तब देश में सांप्रदायिक तनाव फैला था। देश की राजनीति इस मुद्दे से प्रभावित होती रही है।
– हिंदू संगठनों का दावा है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर विवादित बाबरी ढांचा बना था।
– राम मंदिर आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचा गिरा दिया गया था। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या दिया था फैसला?
– 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल, एस यू खान और डी.वी. शर्मा की बेंच ने मंदिर मुद्दे पर अपना फैसला भी सुनाते हुए अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।
– बेंच ने तय किया था कि जिस जगह पर रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दे दिया जाए। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को दे दी जाए। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।
कौन हैं 3 पक्ष, क्या था फॉर्मूला?
– निर्मोही अखाड़ा: विवादित जमीन का एक-तिहाई हिस्सा यानी राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह।
– रामलला विराजमान: एक-तिहाई हिस्सा यानी रामलला की मूर्ति वाली जगह।
– सुन्नी वक्फ बोर्ड: विवादित जमीन का बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा।
सुप्रीम कोर्ट में मामला क्यों पहुंचा?
– हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अयोध्या की विवादित जमीन पर दावा जताते हुए रामलला विराजमान की तरफ से हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की।
– दूसरी तरफ, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद कई और पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन्स दायर कर दी।
– इन सभी पिटीशन्स पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई, 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। तब से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।
केस से जुड़े हजारों कागजात
– केस से जुड़े हजारों कागजात सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए हैं। इनमें अरबी, फारसी और संस्कृत में भी कागजात शामिल हैं। इनका अनुवाद भी किया जाना है। कागजात के डिजिटलाइजेशन में भी लंबा वक्त लगता है।

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