आगरा

महिला खलीफाओं को पगड़ी पहनाकर बढ़ाया मान

सच का उजाला नेटवर्क
आगरा। भगत की 400 साल पुरानी परंपरा तोड़ते हुए पहली बार दो महिलाओं को भगत का खलीफा चुना गया। सूरसदन में जैसे ही दोनों महिला खलिफाओं के सिर पर खलीफा की पगड़ी पहनाई गई तो पूरा हॉल तॉलियों से गूंज उठा और सभी ने उनका उत्साहवर्धन कर आशीर्वाद दिया।
सूरसदन में भगत सम्राट फूल सिंह यादव की स्मृति पर स्मरण प्रेमचंद 2017 के तहत कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत सात साल पहले भगत में अपने जीवन की शुरूआत करने वाली कलाकार हिमानी चतुवेर्दी और पांच साल से भगत में सक्रिय काजल गुप्ता को ये उपलब्धि हासिल हुई। इनके साथ वरिष्ठ भगतकर्मी पतोला राम और युवा भगत कलाकार राकेश यादव को नाटककार असगर वजाहत, सेंट जोंस कॉलेज हिन्दी विभाग अध्यक्ष डॉ. मधुरिमा शर्मा, तपन ग्रुप के चेयरमैन सुरेश चंद्र गर्ग, इं.सुरेंद्र बंसल ने खलीफा पद की पगड़ी बांधी। दोनों ही कलाकार खुद को मिली इस उपलब्धि से बेहद उत्साहित थी और उन्होंने बताया कि इसके बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। इसलिए अब वह भगत को फिर से बुलंदियों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगी। साथ ही इसमें महिलाओं और युवतियों की ज्यादा से भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

उठाया दुष्कर्म का दर्द

आगरा। सामूहिक दुष्कर्म के बाद पीड़िता को किस तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। किस तरह से उसे ही इसके लिए कसूरवार समझा जाता है और समाज एक महिला को किस तरह से दबाने और कुचलने की कोशिश करता है। यहीं कुछ कहानी है मेरे बाबुल का बीजना की। शुक्रवार को सूरसदन प्रेक्षागृह में स्मरण प्रेमचंद 2017 में भगत मेरे बाबुल का बीजना का मंचन किया गया। इस दौरान डॉ. राम अवतार शर्मा, तपन ग्रुप के चेयरमैन सुरेश चंद्र गर्ग भी मौजूद रहे।

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amit tomer

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