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Live Update : नायडू का उपराष्ट्रपति बनना तय! आज शाम तक घोषित कर दिया जाएगा परिणाम

संसद में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग जारी है. 10 बजे शुरू हुई वोटिंग शाम 5 बजे तक चलेगी. शाम सात बजे तक परिणाम भी आ जाएगा. भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के लिए चुनावी मैदान में एनडीए की ओर से वेंकैया नायडू हैं, तो वहीं विपक्ष से पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल और गांधीजी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी हैं.

LIVE UPDATES:

गोपालकृष्ण गांधी ने कहा कि हम दूसरे विभाजन की अनुमति नहीं देंगे. आज संदेह का वायरस है. समुदायों के बीच अत्यधिक अविश्वास है.विपक्ष के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी ने कहा कि यह लड़ाई संवैधानिक सिद्धातों की है. एनडीए के प्रत्याशी अनुभवी व्यक्ति हैं. हमारे बीच में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है.

-वोट डालने पहुंच रहे सांसद

-यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी वोट डाला

-पीएम मोदी और एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार वेंकैया नायडू ने वोट डाला.

– कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी वोट डाला।

मतदान में सांसद अपनी पसंद जाहिर करने के लिए खास तौर से तैयार कलम का इस्तेमाल करेंगे. निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने परंपराओं का हवाला देते हुए बताया कि मतदान के तुरंत बाद वोटों की गिनती होगी. गौरतलब है कि इस चुनाव में राजनीतिक दल व्हिप जारी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वोट गोपनीय मतपत्र के माध्यम से डाले जाते हैं.

बता दें कि  मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है. वह लगातार दो बार इस पद पर रह चुके हैं.

 

– वोटिंग के पहले वैंकेया ने कहा, “मैं किसी पार्टी का नहीं हूं। ज्यादातर पार्टियां मेरी उम्मीदवारी का समर्थन कर रही हैं। उम्मीद करता हूं कि वे सभी मेरे लिए वोट करेंगे।”
– “मैं किसी नेता या पार्टी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। मैं भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहा हूं।”
– “मैं संसद के सभी सदस्यों को जानता हूं, वे मुझे जानते हैं। इसलिए मैंने कैम्पेन नहीं किया। मैंने सभी को विनम्रता से लेटर लिखा, रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा। भरोसा है कि सभी मुझे सपोर्ट करेंगे।”
– गोपालकृष्ण गांधी ने कहा, “सत्ता और विपक्ष दोनों को अधिकार है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार खड़े करें। एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ये चुनाव हो रहा है। इसमें लड़ाई का सवाल ही पैदा नहीं होता। हमारी राजनीतिक व्यवस्था ने ही ये मौका दिया है।”
– मुख्तार अब्बास नकवी  ने कहा, “वेंकैया जी का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। उनके जीतने पर फायदा होगा।”
– कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, “कोई भी व्यक्ति संवैधानिक पदों पर चुनकर आता है तो वह किसी पार्टी का नहीं रह जाता। इस वक्त जो राजनीतिक स्थिति है, उसमें कांग्रेस के सांसद कम हैं। लेकिन ये हमारे लिए चिंता की बात नहीं है।”
10 प्वाइंट्स में समझें उपराष्ट्रपति इलेक्शन
1) शाम 5 बजे तक वोटिंग
– इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। राजनीतिक दलों की तरफ से कोई व्हिप जारी नहीं किया गया है। इसकी वजह है कि वोट सीक्रेट बैलेट के जरिए डाले जाएंगे।
2) रिजल्ट कब आएगा?
– उपराष्ट्रपति पद की वोटिंग खत्म होने के ठीक बाद ही वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। शाम 7 बजे तक रिजल्ट का एलान कर दिया जाएगा। मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी लगातार दो टर्म से इस पद पर हैं। उनका टेन्योर 10 अगस्त को खत्म हो रहा है।
– नए उपराष्ट्रपति 11 अगस्त को कार्यभार ग्रहण करेंगे और वर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को 10 अगस्त को सांसद विदाई देंगे।
3) कैसे होता है ये चुनाव?
– राष्ट्रपति चुनाव के उलट इस चुनाव में विधायक वोट नहीं करते। सिर्फ राज्यसभा और लोकसभा के सभी सांसद वोटिंग करते हैं। सभी सांसद अपनी पसंद का उपराष्ट्रपति चुनने के लिए स्पेशल पेन का इस्तेमाल करते हैं। ये पेन इलेक्शन कमीशन देता है। अगर किसी सांसद ने कोई और पेन का इस्तेमाल किया है, तो उसका वोट रिजेक्ट कर दिया जाता है।
– बैलेट पेपर पर कैंडिडेट्स का सिर्फ नाम होता है। कोई इलेक्शन सिंबल नहीं होता है।
– वो कैंडिडेट जीतता है, जिसे कुल वोट के 50% से एक ज्यादा वोट मिलता है।
4) इस चुनाव में वोट कौन करता है?
– राज्यसभा:
इलेक्टेड: 233
नॉमिनेटेड: 12
– लोकसभा:
इलेक्टेड: 543
नॉमिनेटेड: 02
कुल (233+12+543+02) = 790
– उपराष्ट्रपति बनने के लिए 50% से एक ज्यादा यानी 396 वोट चाहिए।
लेकिन अभी अलग है स्थिति
– लोकसभा में 545 मेंबर हैं, लेकिन 2 सीट खाली हैं। वहीं, बीजेपी सांसद छेदी पासवान को कोर्ट ने अयोग्य घोषित किया है। इस तरह 542 सांसद अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे।
– वहीं, राज्यसभा में कुल 245 मेंबर हैं, लेकिन एक सीट खाली है। 244 सांसद वोट डालेंगे। यानी 542+244= 786 सांसद वोट डाल सकते हैं।
5) क्या है वोटिंग प्रॉसेस?
– उपराष्ट्रपति चुनाव में सांसद प्रिफरेंस के हिसाब से वोट करते हैं।
– मान लीजिए इलेक्शन में चार कैंडिडेट A, B, C, D मैदान में हैं, तो वोटर को सभी कैंडिडेट को वोट देने होते हैं। एग्जाम्पल के लिए: D- को पहली पसंद बताया। B- को दूसरी, A- को तीसरी और C को चौथी।
– फर्स्ट प्रिफरेंस वाले वोटों की काउंटिंग की जाती है। अगर पहली काउंटिंग में ही किसी कैंडिडेट को 396 या इससे ज्यादा वोट मिल जाते हैं तो वह जीत जीता है।
6) अगर क्लियर मेजॉरिटी नहीं मिली तो कैसे होगी काउंटिंग?
– फर्स्ट प्रिफरेंस वोट की काउंटिंग में अगर किसी भी कैंडिडेट को जरूरी 396 या इससे ज्यादा वोट नहीं मिले तो फिर सेकंड प्रिफरेंस के वोट की काउंटिंग की जाती है। इसे ऐसे समझते हैं:
मान लीजिए:
– फर्स्ट प्रिफरेंस में A को 290, B को 150, C को 190 मिले और D 160 वोट मिले। ऐसे में, किसी को भी जरूरी 396 वोट नहीं मिले।
– ऐसी स्थिति में इलेक्शन ऑफिसर सबसे कम वोट मिले कैंडिडेट को बाहर कर देता है। ऐसे में B कैंडिडेट बाहर हो जाएगा। अब ये देखा जाता है कि जिन 150 सांसदों ने B को वोट दिया है, उन्होंने सेंकड प्रिफरेंस वोट किसे दिया है।
अब इसे ऐसे समझें:
– इन 150 सांसदों से A को 108 सेंकड प्रिफरेंस वोट मिले। C को 22 मिले। D को 10 मिले। बाकी बचे 10 वोट B को दिए थे, जो बाहर हो चुका है। इस हिसाब से फर्स्ट और सेकंड प्रिफरेंस के वोट मिलाने पर A को 398, C को 212 और D को 170 वोट मिले। इस तरह A को जीत के लिए जरूरी 396 वोट से 2 ज्यादा मिले। इसलिए A जीत जाएगा।
– इससे भी नतीजा नहीं निकला तो सबसे कम वोट पाने वाले कैंडिडेट को बाहर करने का यह सिलसिला तब तक चलता रहता है, जब तक कि किसी एक कैंडिडेट को जरूरी वोट नहीं मिल जाते।
7) राज्यसभा में अभी किस पार्टी के कितने सांसद?
– बीजेपी: 58, कांग्रेस: 57, सपा: 18, एआईएडीएमके: 13, टीएमसी: 12, जेडीयू: 10, बीजेडी: 8, सीपीआईएम: 8, नॉमिनेटेड: 8, टीडीपी: 6, इंडिपेंडेंट और अन्य: 6, बीएसपी: 5, एनसीपी: 5, डीएमके: 4, टीआरएस: 3, आरजेडी: 3, शिवसेना: 3, एसएडी: 3, पीडीपी: 2, जेडीएस: 1, जेएमएम: 1, केरला कांग्रेस (एम): 1, इंडियन नेशनल लोक दल: 1, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग: 1, सीपीआई: 1, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट: 1, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट: 1, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया: 1, नगा पीपुल्स फ्रंट: 1, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी: 1।
– लोकसभा में एनडीए के पास 338 मेंबर हैं। बीजेपी के पास 281 हैं।
8) राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में फर्क क्या है?
राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति
वोटर्स राज्यसभा-लोकसभा के सभी सांसद और सभी विधानसभाओं के विधायक। 2017 के चुनाव में कुल वोटर 4896 थे। राज्यसभा-लोकसभा के सभी सांसद। इनकी संख्या 790 है।
नॉमिनेटेड मेंबर्स वोट नहीं करते। वोट करते हैं।
वोट की वैल्यू क्या है?
राष्ट्रपति चुनाव में डाले जाने वाले वोट की वैल्यू तय होती है। इसमें राज्य की आबादी का अहम रोल होता है। 1971 की आबादी से कैलकुलेशन किया जाता है।
वोटर के हर एक वोट की वैल्यू एक है।
9) कौन हैं वेंकैया?
– 68 साल के वेंकैया का जन्म 1 जुलाई, 1949 को नेल्लोर के चावतापालेम में हुआ था। वेंकैया का नाम सबसे पहले 1972 के जय आंध्र आंदोलन से सुर्खियों में आया था। 1974 में वे आंध्रा यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन के नेता चुने गए। इसके बाद वह आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन से जुड़े। आपातकाल के बाद ही उनका जुड़ाव जनता पार्टी से हो गया था। वे 1977 से 1980 तक जनता पार्टी की यूथ विंग के प्रेसिडेंट भी रहे। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ गए। 1978 से 85 तक वे दो बार विधायक भी रहे।
– 1980-85 के बीच वेंकैया आंध्र प्रदेश में बीजेपी के नेता रहे। 1985-88 तक पार्टी के जनरल सेक्रेटरी रहे। 1988-93 तक उन्हें राज्य का बीजेपी प्रेसिडेंट बनाया गया। सितंबर, 1993 से 2000 तक वे नेशनल जनरल सेक्रेटरी की पोस्ट पर भी रहे। वे 2002 से 2004 के बीच बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट भी रहे।
– वेंकैया अटल बिहारी वायजेपी के करीबी थे, जिस वजह से उन्हें वाजपेयी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री का जिम्मा सौंपा गया था। मोदी सरकार में वे शहरी विकास, आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन और संसदीय कार्य मंत्री रहे।
– नायडू की पत्नी का नाम एम. उषा है। परिवार में एक बेटा और दो बेटी हैं।
10) कौन हैं गोपाल कृष्ण गांधी?
– 71 साल के गोपाल कृष्ण गांधी का जन्म 22 अप्रैल 1946 को हुआ। उनके पिता देवदास गांधी थे, जो महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी के सबसे छोटे बेटे थे। गोपाल कृष्ण की मां का नाम लक्ष्मी था। वे फ्रीडम फाइटर और कांग्रेस के सीनियर लीडर सी. राजगोपालाचारी की बेटी थीं।
– गोपालकृष्ण 1968 में आईएएस बने। 2004 से 2009 के बीच वे वेस्ट बंगाल के गवर्नर रहे। ये वो दौर था जब 294 मेंबर्स वाली असेंबली में अकेले लेफ्ट के 235 विधायक थे। इसी दौरान बंगाल में सिंगूर और नंदीग्राम जैसे हिंसक आंदोलन हुए।
– 2008 में जब सिंगूर हिंसा की आग में जल रहा था, तब गोपालकृष्ण गांधी ही थे जिन्होंने बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता को बातचीत के लिए राजी किया। लेफ्ट की ताकत बंगाल में कम होती गई और ममता बनर्जी नई ताकत के तौर पर सामने आईं।
– गांधी सेंट स्टीफंस कॉलेज से निकले हैं। आईएएस बनने के बाद 80 के दशक तक वे तमिलनाडु में तैनात रहे। 1985 से 1987 तक वे वाइस प्रेसिडेंट के सेक्रेटरी रहे। अगले पांच साल तक वे प्रेसिडेंट के ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे।
– 1992 से 2003 तक वो कई डिप्लोमैटिक पोस्ट्स पर रहे। 1996 में साउथ अफ्रीका में इंडियन हाईकमिश्नर, 1997 से 2000 तक प्रेसिडेंट के सेक्रेटरी, 2000 में श्रीलंका में हाईकमिश्नर रहे। 2002 के बाद गांधी नॉर्वे और आयरलैंड में एम्बेसडर रहे।

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