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ग्राहकों को रेट कट का पूरा लाभ नहीं दे रहे बैंक

नई दिल्ली, एजेंसी। आरबीआई बैंकों के सामने असहाय लग रहा है। आरबीआई 7 साल से कोशिश कर रहा है कि उसके द्वारा किए गए रेट कट का पूरा फायदा बैंक कस्टमर को पहुंचाएं। लेकिन बैंक उसके इरादे को पूरा नहीं होने दे रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आरबीआई द्वारा लाया गया चाहे बीपीएलआर सिस्टम हो, या उसके उसके बाद बेस रेट और अब मार्जिनल कॉन्सेप्ट पर आधारित लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर तीनों ही सिस्टम में कस्टमर को रेट कट का पूरा फायदा नहीं मिल पाया। रिजर्व बैंक ने हाल ही में एमसीएलआर की समीक्षा के लिए कमेटी बना कर एमसीएअलार की विफलता को स्वीकार किया है। क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी का कहना है कि जनवरी 2015 से अगस्त 2017 के बीच पॅलिसी रेट में कटौती और लेडिंग रेट में कटौती की तुलना करे तो पता चलता है कि ट्रांसमिशन हुआ है पर यह अलग-अलग सेगमेंट में भिन्न है। बैंक रेट कट का फायदा कस्टमर को देने में समय लगा रहे हैं।

आरबीआई असहाय :

पिछले दो साल में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 2 फीसदी
की कटौती की है। लेकिन बैंकों ने इसकी तुलना में लेडिंग रेट में 0.85 फीसदी की ही कटौती की है। भारतीय स्टेट बैंक के रिटायर्ड सीजीएम सुनील पंत का कहना है कि यह साफ है कि एमसीएलआर आने के बावजूद रेट कट का फायदा ग्राहकों तक तेजी से नहीं पहुंचा। अब रिजर्व बैंक को समझ नहीं आ रहा है कि क्या हो रहा है। रिजर्व बैंक ने इसीलिए एमसीएलआर लेंडिंग शुरू की थी की इससे लोन लेने वाले कस्टमर को रेट कट का फायदा तेजी से मिलेगा। लेकिन अब भी ऐसा होता नहीं दिख रहा है।




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