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किशोरावस्था में बढ़ रही है आरामतलबी

यह तो सभी जानते हैं कि शारीरिक गतिविधियों में कमी आने से लोगों में मोटापा बढ़ रहा है। लेकिन इससे भी गंभीर चिंता की बात यह है कि आज के दौर में ज्यादातर किशोरवय लोगों की शारीरिक गतिविधियों का स्तर 60 साल के वृद्ध की शारीरिक गतिविधियों के बराबर है। प्रिवेटिव मेडिसिन नाम के जोर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च में 12529 लोगों को शामिल किया गया था। भागीदारों को ट्रैकिग डिवाइस दी गई थी जिसे उन्हें 24 घंटे पहनना था, सिर्फ नहाते समय और सोते समय उसे अपने शरीर से अलग करना था।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक जिपुनिकव ने बताया कि कि किशोर अवस्था के समाप्त होने पर यानी 19 वर्ष तक की आयु वर्ग के लोगों में शारीरिक गतिविधियों का स्तर सबसे अधिक चिंताजनक पाया गया, वे दिन में उतना ही काम करते पाए जितना एक 60 वर्ष का आम वृद्ध करता है।
इस अध्ययन में भागीदारों को को पांच आयु वर्गो में बांटा गया:-
बच्चे (6 वर्ष से 11 वर्ष)
किशोर (12 वर्ष से 19 वर्ष)
युवा वयस्क (20 वर्ष से 29 वर्ष)
वयस्क (31 वर्ष से 59 वर्ष)
वृद्ध (60 वर्ष से 84 वर्ष)
इस अध्ययन में 49 प्रतिशत लोग पुरुष थे, बाकी महिलाएं।
खास बात यह है कि अध्ययन में केवल 20 से 29 वर्ष तक के आयु वर्ग में ही गतिविधियों का बढ़ा हुआ स्तर पाया गया। सुबह के समय इस वर्ग के लोगों की गतिविधियां अपने से छोटे किशोरवय लोगों के मुकाबले आधिक थीं। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक, युवाओं में शारीरिक गतिविधियों के बढ़े हुए स्तर की वजह एक वजह फुलटाइम वर्क और जीवन की अन्य गतिविधियां हो सकती है। हालांकि पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले गतिविधियों का स्तर अधिक पाया गया। लेकिन, मिडलाइफ (31 वर्ष से 59 वर्ष) में इन युवा पुरुषों की गतिविधियों का स्तर महिलाओं के मुकाबले कम हो जाता है। मजेदार बात यह है कि 60 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले अधिक गतिहीनता देखी गई है।
फिलहाल इस अध्ययन से पुष्टी होती है कि शारीरिक श्रम को लेकर अनुशंसित दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है. मसलन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) पांच वर्ष से 17 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए मध्यम से लेकर कड़े शारीरिक श्रम की सिफारिश करता है। अध्ययन में पाया गया कि छह वर्ष से 11 वर्ष तक के 25 प्रतिशत से अधिक लड़के और 50 प्रतिशत लड़कियां डब्लूएचओ के दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं करते हैं, जबकि 12 वर्ष से 19 वर्ष तक के वर्ग में 50 प्रतिशत लड़के और 75 प्रतिशत लड़कियां इन दिशानिर्देशों का अनदेखी करते हैं।

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Som Sahu

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