इंटरनेशनल क्राइम

चाइल्ड एब्यूज का शिकार! तो नहीं हो रहा आपका बच्चा?

-शिव ओम गुप्ता
घरों व परिवारों में यौन शोषण अथवा उत्पीड़न जैसे अपराध की शिकार बच्चों व बच्चियों की घटनाएं अक्सर सुर्खियां बनती हैं, जिसमें अधिकतकर मामलों में अपराधी निकट का ही अथवा जानने वाला होता है, लेकिन ऐसे अपराधों पर अक्सर हम, हमारा परिवार, हमारा समाज और प्रशासन चुप्पी साध लेता है या कम ध्यान देता है. आंकड़ों पर गौर करें तो हर 4 में से 1 लड़की और हर 6 में से 1 लड़का 18 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते चाइल्ड एब्यूज का शिकार हो चुका होता है. बच्चों के साथ एब्यूज करने वाले ऐसे 90 फीसदी अपराधी निकट के संबंधी व जानकार होते हैं. मसलन, रिश्तेदार, टीचर, काउंसलर, ट्यूटर, बेबी सिटर, खास मित्र व भरोसेमंद पड़ोसी इनमें शामिल हैं जबकि 30-40 फीसदी बच्चे परिवार के सदस्यों के द्वारा ही एब्यूजिंग के शिकार होते हैं. दुनियाभर में चाइल्ड एब्यूज के शिकार हुए 7 पीड़ित बच्चों में से 1 बच्चा 5 वर्ष अथवा इससे पहले एब्यूजिंग शिकार हो जाता है. वहीँ, 6 वर्ष से कम उम्र के 40 फीसदी पीड़ित बच्चों में से महज 10 फीसदी ही किसी से अपनी आपबीती कहने की हिम्मत कर पाते हैं.

चाइल्ड एब्यूज के खिलाफ राहुल बोस का HEAL
मशूहर फिल्म एक्टर राहुल बोस ने पिछले सप्ताह ही चाइल्ड एब्यूज से बच्चों की सुरक्षा के लिए HEAL (Help Eradicate Abuse through Learning) नामक एक एनजीओ लांच किया है. इस एनजीओ का मकसद देश से चाइल्ड एब्यूज को जड़ से समाप्त करना है. हालांकि खुद राहुल बोस मानते हैं कि यह कह पाना जितना आसान है उसमें सफल हो पाना उतना ही मुश्किल काम है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2007 में पूरे भारत में कुल 12,447 बच्चों पर किए गए एक सर्वे में पाया गया कि इनमें से करीब 53 फीसदी बच्चे चाइल्ड एब्यूज के शिकार हुए थे. इस सर्वे में सभी वर्ग (अमीर-गरीब, वर्ग-समुदाय) के बच्चों को शामिल किया गया था. अनुमानतः भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के अनुमानतः 40 करोड़ बच्चे हैं, तो भारत में कुल 20 करोड़ बच्चे चाइल्ड एब्यूज के शिकार हैं, जो कि एक भयावह स्थिति का सूचक है. एक अनुमान के मुताबिक चाइल्ड एब्यूज के शिकार तकरीबन 50 फीसदी बच्चों का यौन उत्पीड़न घर के अंदर होता है, जिसमें परिवार के सदस्य, खास दोस्त, भरोसेमंद पड़ोसी अथवा घरेलू नौकर प्रमुख होते हैं.

चाइल्ड एब्यूज के शिकार बच्चों की मनोदशा
चाइल्ड एब्यूज का शिकार हुआ बच्चा कभी भी अपने साथ हुए हादसे को परिवार से शेयर नहीं कर पाता है, क्योंकि उसे लगता है कि उसके साथ यह हादसा उसकी ही किसी गलती के कारण हुआ होगा (रेप की शिकार हुई अधिकांश महिलाओं के साथ भी ऐसा होता है) अथवा बच्चे यह सोचकर चुप्पी साध लेते हैं, कि परिवार उसका पक्ष सुनेगा नहीं अथवा उसकी बातों पर भरोसा ही नहीं करेगा.

दूसरा पहलू यह है कि भारत में सेक्स और सेक्सुएलिटी पर चर्चा कम ही की जाती है और अगर कोई बच्चा हिम्मत करके अपने साथ हुई किसी ऐसी वारदात को बताना भी चाहता है तो बदनामी के डर से अथवा जग हंसाई के कारण परिवार के भीतर ही मामले को अनदेखा अथवा शांत करने की कोशिश की जाती है जबकि ऐसे समय में जरूरत होती है कि परिवार एब्यूज्ड बच्चे का साथ दे और दोषी को दंडित करवाने की कोशिश करें.

सेलिब्रेटीज भी हुए चाइल्ड एब्यूज के शिकार-

फिल्मकार अनुराग कश्यप ने बताया कि 11 वर्ष की उम्र में वो कई बार सेक्सुल एब्यूज के शिकार हुए थे. उन्होंने बताया कि बचपन में उनका एब्यूज करने वाले शख्स की उम्र तब 22 वर्ष थी और वह उनके परिवार का जानने वाला था.-अनुराग कश्यप, मशहूर फिल्म निर्देशक

बचपन में चाइल्ड एब्यूज की शिकार हुईं मॉडल एंड एक्ट्रेस सोफिया हयात ने अवसाद भरे क्षण को याद करते हुए एक बार बताया था कि जब वो 10 वर्ष की रही होंगी, तब उनके सगे अंकल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था. -सोफिया हयात, मॉडल एंड एक्ट्रेस

बॉलीवुड की कई फिल्मों में एक्टिंग कर चुकी पाकिस्तानी एक्ट्रेस सोमी अली को बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान के पूर्व गर्लफ्रेंड के रुप में अधिक जाना जाता है. उन्होंने ने भी बचपन में हुए चाइल्ड एब्यूज की बात शेयर करते हुए कहा था कि 5 वर्ष की उम्र में उनका भी यौन शोषण हुआ था.
-सोमी अली, पाक एक्ट्रेस

अमेरिका की मशूहर पॉप सिंगर लेडी गागा भी बचपन में चाइल्ड एब्यूज की शिकार हुईं थीं. एक पब्लिक मीटिंग में लेडी गागा ने बताया था कि जब वह 19 वर्ष की थी तब उनके साथ रेप किया गया. गागा ने अपने साथ हुए रेप और सेक्सुअल एब्यूज को स्वाइन नामक म्युजिक एल्बम के जरिए लोगों के सामने रखा था. बकौल गागा, उन्हें इस अवसाद से निकलने में 4-5 वर्ष लग गए थे.
-लेडी गागा, पॉप सिंगर, अमेरिका

अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म देव डी में एक बोल्ड किरदार में बॉ़लीवुड में डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस केल्कि कोचलिन ने जब पब्लिकली यह स्वीकार किया कि उनके साथ बचपन में एब्यूज किया गया था तो लोगों को सहसा विश्वास नहीं हुआ. बकौल केल्कि, बचपन में उनके साथ हुआ एब्यूज एक सच है, जिसका दंश उन्हें कई वर्षों तक झेलना पड़ा था.-केल्कि कोचलिन, एक्ट्रेस

मशहूर सितारवादक पंडित रविशंकर की बेटी व सितारवादक अनुष्का शंकर को भी बचपन में चाइल्ड एब्यूज का शिकार होना पड़ा. यानी चाइल्ड किसी क्लास-सेक्सन अथवा अमीर-गरीब से जुड़ा हुआ अपराध नहीं है. अनुष्का शंकर ने बताया कि बचपन में वह एक बहुत ही नजदीकी और भरोसवाले शख्स की यौन प्रताड़ना की शिकार हुईं थीं.-अनुष्का शंकर, सितारवादक

ऐसे समझे, कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा एब्यूज का शिकार

डोमेस्टिक एब्यूज
अगर आपके बच्चे को आपका कोई रिश्तेदार या जानने वाला किसी भी तरीके से कंट्रोल करने, चिढ़ाने और हिंसक धमकी देने जैसा व्यवहार करता हुए दिखता हैं तो यह डोमेस्टिक एब्यूज के दायरे में आता है, जिसके जरिए ऐसा शख्श भविष्य में आपके बच्चे के साथ वह इमोशनल, फिजिकल, सेक्सुअल, फाइनेंशियल अथवा मनोवैज्ञानिक एब्यूज कर सकता है.

सेक्सुअल एब्यूज
अगर आपका कोई जानकार आपके नाबालिग बच्चे के साथ यौन विषयों पर खुलेआम चर्चा करते अथवा यौन से जुड़ी एक्टिविटी करते हुए दिखता है तो अलर्ट हो जाइए, क्योंकि आपकी जरा सी भी अनदेखी आपके बच्चे को सेक्सुअल एब्यूज का शिकार बना सकती है. जरूरी नहीं है कि आपका जानने वाला उसके साथ फिजिकल नहीं हो रहा.

बेपरवाही
अगर आप अपने नाबालिग बच्चे के साथ बेपरवाही से पेश आते हैं और उसकी जरूरत की स्वाभाविक व जरूरी चीजों को उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो बहुत अधिक संभव है कि आपका बच्चा निजी जरूरतों की खातिर दूसरों की एब्यूज का शिकार हो सकता है. मसलन, अगर आपका बच्चा भूखा है अथवा उसके पास अच्छे कपड़े नहीं है तो आपकी बेपरवाही में किसी और के गलत नीयत का वह शिकार बन सकता है.

साइबर एब्यूज
वर्तमान समय में साइबर एब्यूज बहुत बड़ा विषय बन चुका है. चाहे वह सोशल नेटवर्किंग साइट्स हो, ऑनलाइन गेमिंग हो अथवा मोबाइल फोन का प्रयोग हों. इसके जरिए नाबालिग बच्चे आजकल बच्चे सेक्सुअल, इमोशनल और मनोवैज्ञानिक एब्यूज के आसानी से शिकार हो रहे हैं. यानी दूसरे छोर पर ऑनलाइन बैठा कोई भी शख्श आपके बच्चे को फोटो, वीडियो और हिंसक गेम के जरिए एब्यूज कर सकता है.

फिजिकल एब्यूज
घर से बाहर ही नहीं, घर और परिवार में बैठा शख्स भी आपके नाबालिग बच्चे को फिजिकल एब्यूज का शिकार बना सकता है. मसलन, अचानक आपके बच्चे को कोई गहरी चोट लग गई, उसके नाक व मुंह खून निकलने लगा हो, तो इसको इग्नोर करना बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि संभव है कि आपके बच्चों को एब्यूज करने के लिए किसी ने उसकी जोरदार पिटाई की हो.

इमोशनल एब्यूज
नाबालिग बच्चों को एब्यूज करने का यह सबसे खतरनाक और गंदा तरीका है, जिसका शिकार हुआ बच्चा मनोवैज्ञानिक रुप से गंभीर नुकसान का शिकार हो सकता है और इससे उसके इमोशनल स्वास्थ्य और दैहिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. मसलन, जानबूझकर बच्चे को घर में अकेला छोड़ देना, बात-बात में इग्नोर करना, डराना-धमकाना और अनावश्यक परेशान भी इमोशनल एब्यूज के दायरे में आता है.

गिफ्ट लेना-देना
यह भी एक तरह का चाइल्ड एब्यूज है. मसलन, कोई शख्स आपके बच्चे पर अनावश्यक ध्यान दे रहा हो अथवा उसे बार-बार गिफ्ट देकर खुश करने की कोशिश कर रहा हो तो सावधान हो जाइए, क्योंकि ऐसा करके वह आपके बच्चे को न केवल आपसे दूर कर रहा है बल्कि सेक्सुअल एब्यूज जैसी एक्टिविटी के लिए तैयार भी कर रहा होता है.

चाइल्ड ट्रैफिकिंग
वर्तमान समय में चाइल्ड ट्रैफिकिंग आधुनिक दासता की तरह है, जिसमें बच्चों को खरीदा, बेचा और उनकी एक राज्य से दूसरे राज्य में तस्करी भी की जाती है. बच्चों की खरीदारी करने वाला शख्स ऐसे बच्चों को एब्यूज करता है. बच्चों की तस्करी और उनके यौन शोषण जैसी खबरें आजकल हर दिन अखबारों की सुर्खियां बनती हैं. इनमें नाबालिग बच्चों को जबरन विवाह, घरेलू नौकरी दिलाने और मजदूरी जैसा तरीकों से ठेला जाता है.

ग्रूमिंग
अगर आपका कोई परिचित अथवा अपरिचित आपके बच्चे के साथ जरूरत से अधिक घुलने-मिलने की कोशिश करता है और बच्चे का भरोसा जीतने की लगातार कोशिश करता है तो यह चाइल्ड एब्यूज का कारक बन सकता है, जिसमें सेक्सुअल एब्यूज, सेक्सुल प्रताड़ना अथवा ट्रैफिकिंग जैसे अपराध शामिल है.

गाली-गलौज
अगर आपके बच्चे के साथ कोई प्रायः गाली-गलौज में बात करता हो, कहावतों व अश्लील गानों के माध्यम से आकर्षित करने की कोशिश करता है अथवा गलत तरीके से छूने की कोशिश करता है तो सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि आगे चलकर ऐसा करने वाला शख्श आपके बच्चे के साथ सेक्सुअल एब्यूज करने की तैयारी कर रहा हो सकता है.

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amit tomer

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