राजनीती

भावुक हुए मोदी, पूर्व राष्‍ट्रपति को लिखी चिट्ठी

नई दिल्‍ली : पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी  ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से लिखी गई एक चिट्ठी को गुरुवार को सार्वजनिक किया है. प्रणब मुखर्जी ने इस चिट्ठी को जारी करते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री की तरफ से लिखा गया यह पत्र मेरे दिल को छू गया. यह चिट्ठी प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्‍ट्रपति को 24 जुलाई को लिखी थी. आपको बता दें कि इस दिन प्रणब मुखर्जी का राष्‍ट्रपति के तौर पर आखिरी दिन था. पूर्व राष्‍ट्रपति ने इस चिट्ठी को अपने ट्विटर हैंडल के माध्‍यम से सार्वजनिक किया है.

प्रणब मुखर्जी के ट्वीट पर प्रधानमंत्री ने लिखा है कि आपके साथ करना अच्‍छा लगता था. पूर्व राष्‍ट्रपति को लिखी गई इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्‍हें ‘डियर प्रणब दा’ लिखकर संबोधित किया है. पीएम ने चिट्ठी में लिखा कि समय-समय पर मिलने वाले आपके मार्गदर्शन से मेरा आत्‍मविश्‍वास बढ़ा है. गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्‍ट्रपति को ‘अभिभावक और मार्गदर्शक’ बताया था. उन्‍होंने कहा था कि प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद उन्होंने अंगुली पकड़ कर विभिन्न विषयों पर मुझे रास्ता दिखाया था.

 

प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल समाप्त होने के कुछ दिन पहले आयोजित हुए एक कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री मोदी ने निवर्तमान राष्ट्रपति के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि मुखर्जी ने उनका ऐसे खयाल रखा जैसे कोई पिता अपने बेटे का रखता है. पुस्तक ‘प्रेसीडेंट प्रणब मुखर्जी : ए स्टेट्समैन’ को जारी करते हुए मोदी ने कहा था कि वह सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें दिल्ली में उनके शुरुआती समय में ही मुखर्जी का साथ मिला और पिछले तीन वर्षों में ऐसी कोई मुलाकात नहीं रही जब राष्ट्रपति ने उनके साथ अपने बेटे जैसा बर्ताव नहीं किया.

मोदी ने भावुक अंदाज में कहा था ‘मैं ऐसा तहेदिल से कह रहा हूं. जैसे कोई पिता अपने बेटे का खयाल रखता है.’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘प्रणब दा कहते, मोदी जी आपको आधे दिन आराम करना होगा. क्यों आप इतनी भाग-दौड़ करते हैं. आपको अपना कार्यक्रम संक्षिप्त करना चाहिए. आपको अपने स्वास्थ्य का ख्‍याल रखना चाहिए.’ मोदी ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान उन्होंने मुझसे कहा कि जीत और हार हमेशा होती रहती है, लेकिन आप अपने शरीर का ख्‍याल रखें.

मुखर्जी ने भी मोदी के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट करते हुए उनकी सराहना की थी. उन्‍होंने कहा दोनों के विचार अलग-अलग रहे हैं, लेकिन इसे उन्होंने खुद तक रखा और करीबी सहयोग से काम किया. मुखर्जी ने कहा कि इसने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच संबंध को प्रभावित नहीं किया. मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने कई बार वित्त मंत्री अरुण जेटली से स्पष्टीकरण मांगा और उन्होंने अक्सर विभिन्न मुद्दों पर सरकार के रुख को रखा और जेटली ने अक्सर उन्हें एक सक्षम और प्रभावी अधिवक्ता की तरह समझाया, जैसा वह हैं.

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amit tomer

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