राजनीती

प्रधानमंत्री मोदी को क्यों कहना पड़ा, ‘अब जाओ अम्मा!’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए लोग कित्ते पापड़ बेलते होंगे. हर ऐरा गैरा नत्थूखैरा थोड़ी मिल सकता है. गरीब आदमी तो बस उस आभामंडल से ही दहल के रह जाता है, उनसे मिलने का सपना देखना तो बड़ी दूर की बात है. लेकिन बेहद गरीब रामरती को ये मौका मिल गया. उन्होंने प्रधानमंत्री से इतनी ज्यादा रिक्वेस्ट की कि उनको कहना पड़ा ‘अब जाओ अम्मा.’

कैसे बना ‘संजोग’

मामला ये था कि लखनऊ के डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी में लोग इकट्ठा हुए थे. ये लोग थे जिनको प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा मिला था. जिनमें से 10 लोगों को प्रधानमंत्री अपने निजी हाथों से सर्टिफिकेट देने वाले थे. उन्हीं में से एक रामरती भी थी.

गांवों में शिष्टाचार चार बिलांग आगे चलता है. वहां किसी की शादी में कोई बिना बुलाए खाने लगे तो उसको मारते नहीं हैं. गांव वाले अब सीधे तो नहीं ही होते हैं, उनके जितना काइंयां खोजे नहीं मिलते लेकिन कुछ परंपरा खाल से मैल की तरह चिपकी होती है. रामरती के अंदर भी वही शिष्टाचार जोर मारा और वो बच्चों की तरह कहने लगीं कि घर तो आपने दे दिया है, लेकिन जब लड़के की शादी करूंगी तो आपको आना पड़ेगा. फिर पीएम की तरफ से ये रिएक्शन आया.

फिर पीएम ने स्पीच दी तो उसमें रामरती का जिक्र किया. कहा कि एक मां ने उन्हें अपने बेटे की शादी में बुलाने का वादा किया है.

एक थी राहुल की कलावती

पावरफुल लोगों के बीच में आम लोगों के किस्से अक्सर आते हैं. रामरती के हालात पर इस मुलाकात का आगे क्या असर पड़ेगा ये किसी को नहीं पता. इसी तरह राहुल गांधी ने कलावती से मुलाकात की थी. कलावती विदर्भ के यवतमाल जिले के जालका गांव में रहती थीं. उनका पति किसान था जिसकी मौत हो चुकी थी, 8 बच्चे थे. 2008 में राहुल गांधी कलावती से मिले थे. यहां से कलावती की किस्मत बदल गई थी. सुलभ इंटरनेशनल ने कलावती की 36 लाख रुपए देकर मदद की थी जिसके बाद उनकी जिंदगी काफी आसान हो गई थी.

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