अब जीना है जीएसटी के संग, तो लेना ही होगा जीएसटीआईएन

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नई दिल्ली।
जीएसटी लागू होने के पहले तीन दिन टेक्सटाइल और अन्य छोटे व्यापारियों के कड़े प्रतिरोध के साथ गुजरे हैं। जीएसटी को लेकर असंख्य सवाल हैं जिसका जवाब देने के लिए सरकार ने अफसरों को तैनात कर रखा है। दस अधिकारी केंद्रीय वित्त मंत्रालय में बनाए गए जीएसटी फीडबैड एडं एक्शन रूम में 14 घंटे ड्यूटी दे रहे हैं। जीएसटी कैसे भारत की अर्थव्यवस्था को बदलेगा इसके लिए अभी एक्सपर्ट और आम नागरिक लगातार इस पर बहस कर रहे हैं। हालांकि वास्तविक प्रभाव अभी कुछ दिनों बाद ही सामने आ पाएंगे। फिलहाल जीएसटी एक हकीकत है और अब इसके साथ जीने की आदत भी डालनी होगी।
क्या है जीएसटीआईएन
इसके लिए जीएसटी लागू होने के साथ कराधान प्रणाली में हुए बदलावों को जानना जरूरी है। सबसे जानते हैं जीएसटीआईएन (गुड्स एंड सर्विसेज आइडेंटिफिकेशन नंबर) के बारे में। यह मूल रूप से एक 15 अंको की संख्या जिसने उस टैक्स आइडेटनिफिकेशन नंबर का स्थान लिया है जो कंपनियों के राज्यों में वैल्यू एडेड टैक्स नियम के तहत रजिस्टर दौरान उन्हें मिला था। लेकिन अब जीएसटी लागू होने के बाद इन सारे नम्बरों को जीएसटीआईएन से स्थानांतरित कर दिया जाएगा। आपको जीएसटी पोर्टल पर रजिस्टर करने के दौरान आपको एक एआरएन (एप्लीकेशन रेफेरेंस नंबर ) भी मिलेगा जो आपको अपने एप्लीकेशन से जुड़े किसी भी पूछताछ के लिए मदद करेगा।
क्या है प्रक्रिया?
जीएसटीएन नंबर को पाने के लिए हर व्यवसाय को सिर्फ दो चरण की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। प्रक्रिया आसान है। करदाताओं और और जीएसटी प्रैक्टिशनर्स के लिए रजिस्ट्रेशन अभी जीओवी.जीएसटी.आईएन पर खुल चूका है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन इससे जुड़ी सभी फायदों को उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
जीएसटीआईएन में क्या?
जीएसटी नियम के तहत, अप्रत्यक्ष कर उद्देश्यों के लिए जरूरी सभी अलग पहचान संख्या को केवल एक संख्या जीएसटीआईएन द्वारा बदल दिया जाएगा। सभी टैक्सपेयर को अब एक ही अनुपालन और प्रशासन के अंतर्गत एक प्लेटफार्म पर लाया गया है, और एक ही अथॉरिटी के तहत पंजीकरण सौंपा गया है। सभी व्यवसायों को एक अलग वस्तु एवं सेवा कर पहचान संख्या(जीएसटीआईएन) प्रदान किया जायेगा। यह 15 अंको की संख्या जिसने उस टैक्स आइडेटनिफिकेशन नंबर का स्थान लिया है जो कंपनियों के राज्यों में वैल्यू एडेड टैक्स नियम के तहत रजिस्टर दौरान उन्हें मिला था।


प्रत्येक टैक्सपेयर को राज्य के अनुसार पैन आधारित 15 अंकों के वस्तु और सेवा टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआईएन) आवंटित किया जाता है।
1. पहले दो अंक भारतीय जनगड़ना 2011 के अनुसार स्टेट कोड को रेप्रेजेंट करता है।
2. अगले 10 अंक टैक्सपेयर का पैन नंबर होता है।
3. तेरहँवा अंक राज्यों में रजिस्ट्रेशन के आधार पर होता है।
4. चौदहंवा अंक डिफॉल्ट रूप से े है।
5. अंतिम अंक ‘राशि’ चेक कोड है।

कैसे होता है आवंटित?
इसके लिए दो चरण का वेरिफिकेशन प्रोसेस है।
चरण एक : जीएसटी नेटवर्क पोर्टल पर रजिस्टर करने के बाद हर व्यवसाय को एक प्रोविजनल नंबर दिया जाता है।
चरण दो : दूसरे चरण में बिजनेस एंटिटी को जीएसटी पोर्टल पर लोग इन करन होगा और अपने व्यवसाय के बारे में व्यवसाय का जगह, निदेशक और बैंक अकाउंट जैसे कुछ विवरण साँझा करना होगा।
विशेष रूप से, सरकार ने ट्रेडर्स और व्यवसायों को उनके अंतिम पहचान संख्या नहीं मिलने तक 1 जुलाई के बाद प्रोविजनल आईडी के साथ भी अपना व्यवसाय जारी रखने की इजाजत दी है।
एआरएन क्या है ?
एआरएन का फुल फॉर्म एप्लीकेशन रेफेरेंस नंबर है। मूल रूप से, जीएसटी में एआरएन का मतलब, किसी यूजर को अपना रजिस्ट्रेशन स्टेटस जानने की सुविधा है। इसमें एआरएन रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और मेल आईडी पर भेजा जायेगा। एआरएन में आपके रजिस्ट्रेशन के पांच संभावित स्टेटस हो सकते है। ये स्टेटस है, प्रोविजनल, पेंडिंग फॉर वेरिफिकेशन, वैलिडेटिंग अगेंस्ट एरर, माइग्रेटेड और कैंसलेड।

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